

नई दिल्ली : देश हर तरफ नोवल कोरोना के संकट के दौर से गुजर है I विश्व के कई बड़े देशों में बेशुमार मौते हो रही है, हर तरफ लाचारी, खोफ का आलम है I “आज सब डरे हुए हैं जीवत हैं पर मरे हुए हैं” भारत के प्रधान मंत्री को अपनी एक सौ तीस करोड़ जनता को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए दो बार लॉक बन्दी की घोषणा करनी पड़ी I सारे देश में पहले चरण में 21 दिन के लॉक डाउन के बाद पुनः 19 दिन का ऐलान करना पड़ा I
आज कोरोना की जंग में सरकार का पूरा अमला जोहर (मुकाबला) कर रहा है i आज इस ख़ौफ़नाक माहौल में कोई अपनी जिदगी बचाने की जद्दोजहद में लगा है और कोई दूसरे की जिदगी की बचाने के लिए दिन रात किये हुए हैं i जब से कोरोना ने दिल्ली में सितम ढहना शुरू किया है तब से दिल्ली की पुलिस को कई मोर्चों पर युद्ध लड़ना पड़ रहा है i
लॉक डाउन की घोषणा के बाद देश में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया तो दिल्ली पुलिस ने इस चुनोतीपूर्ण वक्त मे संयम बनाये रखा और दिल्ली की जनता को हतोत्साहित नही होने दिया I आज दिल्ली पुलिस को कानून व्यवस्था के साथ साथ दिल्ली में गरीब ओर मजदूरों के लिए आश्रय ओर उनके भोजन का इंजामात भी करना पड़ रहा है I पुलिस ही अपनी जिंदगी को खतरे में डाल कर कोरोना संक्रमितों की तलाश कर रही साथ ही उनसे सम्बन्ध रखने वालों की कड़ियों को तलाश कर डेटा इक्क्ठा कर रही है I खासकर कोरोना संक्रमण का आतंक बन चुके जमातियों को जान की परवाह किये बिना ढूंढने के बाद उनकी `क्वारनटाइन सेंटर’ में निगरानी करना I
यह कोरोना की जंग में दिल्ली पुलिस के कार्यो की छोटी से झलकी है I आज पुलिस महज एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम नही कर रही है बल्कि इंसानियत की निगहबान बन कर अपने दोनों फर्ज निभा रही है I
दिल्ली में पुलिस के जवान इस अथक सेवा के चलते कहीं किसी अवसाद से ग्रसित न हो जाएं उनका मनोबलन बरकरार बना रहे इसके लिए उच्च अधिकारी भी समय समय पर उनका हौसला अफजाई करते रहते हैं I इसी कड़ी में नई दिल्ली के उपायुक्त डॉ0 ईश सिंघल ने एक पहल की है I इसको उन्होंने `WORK AT HOME’ नाम दिया है I जिले के थानों में डयूटी दे रहे इंस्पेक्टर्स अब क्रम से तीन दिनों के लिए अपने घर जा सकते हैं I

अब प्रत्येक थाने के प्रभारी से लेकर हर इंस्पेक्टर तीन दिन अपने परिवार के बीच रहकर स्वयं तथा सदस्यों की देखभाल करेगा I इसके अतिरिक्त अपने सभी ऑफिशियल वर्क को घर पर रहकर कर सकते हैं I यह आदेश दिन रात कोरोना से जूझ रहे इन पुलिस अधिकारियों के लिए सौगात से कम नही है I दिल्ली विश्वविघालय में मनोविज्ञान की छात्रा नंदनी शर्मा के मुताबिक “इस नोवल कोरोना त्रासदी के चपेट में अब दिल्ली पुलिस के कर्मचारी भी आने लगे हैं I इस प्रकार की खबरों को जब पुलिसकर्मियों के परिवार के लोग सुनते हैं तो उनके दिलों दिमाग में नकारात्मक शंकाये उभरती हैं जिसके चलते उनमें भी डिप्रेशन के और बार बार फोन करके पूछताछ करने मनोस्तिथि बन जाती है I इस प्रकार ड्यूटी पर तैनात व्यक्ति भी मानसिक अवसाद से गुजरने लगता है” I जिले के उपायुक्त का यह रचनात्मक कदम उनकी कार्यक्षमता के स्तर में इजाफा करेगा साथ ही परिवार के बीच रहकर सदस्यों में आत्मविश्वास भी पैदा करेगा I
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