
नई दिल्ली : “जिंदा थे तो जिंदगी के सफर में हम साया साथ था, जिंदगी क्या गई सफर में शामिल साये साथ छोड़ गए” यह लाइन एक हकीकत बन गई है । जो कभी अपने कहलाते थे आज वही मौत पर मुँह मोड़ कर खड़े हो रहे हैं । अब कोरोना से होने वाली मौतों से मृतकों की अर्थी को कंधा देने के लिए भी लोग नही आ रहे हैं । ऐसे में गैर समझी जाने वाली दिल्ली पुलिस अपनों से बढ़कर साथ खड़ी नजर आ रही है ।
उत्तरी दिल्ली के सराय रोहिल्ला थाना इलाके में पुलिस को PCR कॉल मिली ” एक 85 साल की वृद्ध महिला का निधन हो गया है । मौके पर उसके पास उसका पौत्र है और महिलाएं हैं । मृत वृद्धा के अंतिम संस्कार के लिए मदद चाहिए” । कॉल मिलने के तुरंत बाद इंस्पेक्टर जितेंद्र तिवारी, हवलदार संदीप, हवलदार ओमप्रकाश, हवलदार पुष्कर और सिपाही नवनीत के साथ मौके पर पहुंचे । वहाँ विडम्बना यह थी कि आसपास के लोग कोरोना के ख़ौफ़ के चलते मदद के लिए नही आ रहे थे ।
पुलिस ने बिना वक्त गंवाये एक परिवार के सदस्यों की तरह मानवीय धर्म की मिसाल पेश की ।
पुलिस ने वृद्धा को अंतिम संस्कार के लिए अर्थी को अपने हांथो से सजाया और फिर सभी ने मिलकर अर्थी को अपने कंधों का सहारा देकर अंतिम क्रिया के लिए शमशान तक ले गए ।

पुलिस ने अपनी ड्यूटी के साथ साथ मानवता का भी कर्त्तव्य निभाया । किन्तु उन लोगों की इंसानियत कहाँ गई जिनके सामने एक मृत देह पड़ी है उसकी अंतिम यात्रा में चलने के लिए किसी ने एक कदम तक आगे नही बढ़ाया । इस घटना ने साबित कर दिया कि अब इंसान कितना खुगर्ज हो गया है ।


