
दक्षिण भारत का ड्रग्स तस्करी का सरगना शोले राज को पुलिस पकड़ कर लाती हुई
एम्बुलेंस को बनाया ड्रग्स माफिया ने ड्रग्स सप्लाई का जरिया ।
दक्षिण भारत से एम्बुलेंस में होती थी दिल्ली में ड्रग्स सप्लाई ।
उत्तरी दिल्ली : `अक्सर कहा जाता है एक छोटी सी चिंगारी आग बन सकती है। ऐसा ही एक छोटी सी शिकायत ने दक्षिण भारत के एक बहुत बड़े मादक पदार्थों के तस्करों के रैकेट का पर्दाफाश किया है। नार्थ दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ की टीम ने मात्र एक छोटी सी शिकायत को आधार बना कर 180 किलो गांजे के साथ 4 ड्रग्स माफियाओं को गिरफ्तार किया है।
नार्थ दिल्ली पुलिस को किसी स्थानीय नागरिक ने शिकायत भेजी थी `जिसमे जिक्र किया गया था की गुलाबी बाग में एक व्यक्ति खुले आम स्मैक बेचता है और इसका नाम राजीव है जो इलाके का घोषित अपराधी (BC) है।

इस शिकायत को पढ़कर उत्तरी दिल्ली के डीसीपी एन्टो अल्फोंस ने जिले के स्पेशल स्टाफ को इस शिकायत पर कार्यवाही के निर्देश दिए। 9 अक्टूबर को स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर सुनील शर्मा की टीम ने गुलाबी बाग़ में छापेमारी की कार्यवाही की मगर वहां पुलिस पर ड्रग्स माफियाओं से घिर गई। वहाँ पुलिस टीम पर हमला करके 4 पुलिस कर्मियों को घायल कर डाला । ड्रग्स बेचने वाले राजीव ने बचने के लिए पुलिस पर फायरिंग कर दी । पुलिस ने दोबारा कार्यवाही के राजीव और उसके साथियों को गिरफ्तार कर धारा 307 के तहत मुक़दमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया ।

ड्रग्स माफियाओं के हमले से घायल नार्थ दिल्ली स्पेशल स्टाफ के पुलिस कर्मी
मुम्बई में ड्रग्स कांड के चलते देश भर में मादक पदार्थों खरीदने और बेचने वालों पर सख्त कार्यवाही शुरू होने के चलते जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस टीम ने गुलाबी बाग की गलियों में एक के बाद एक छापेमारी शुरू कर दी। वहां से सरिता नाम की महिला के घर से गांजा बरामद किया । पुलिस ने NDPS ACT के अंतर्गत सरिता को जेल भेज दिया । इस गिरफ्तारी ने पुलिस की आगे की राहे आसान कर दी।

यही से स्पेशल स्टाफ की टीम ने दिल्ली में गांजा सप्लाई की कड़ी को तलाशना शुरू कर दिया । पुलिस को पता लगा कि दिल्ली में गांजा सप्लाई का मुख्य ठिकाना नार्थ दिल्ली का मोरी गेट है वहांं मद्रासी कॉलोनी से गांजा दिल्ली के इलाकों में भेजा जाता है । इसके बाद पुलिस ने मुखबरी मिलने के बाद मद्रासी कॉलोनी में गांजा सप्लाई करने वाले रमेश को पकड़ा । रमेश ने पुलिस को बताया कि गांजे की सारी खेप दक्षिण भारत के विशाखापट्टनम से आती है । सारा गांजा एम्बुलेंस के जरिये दिल्ली पहुंचाया जाता है । ड्र्ग्स सप्लाई में एम्बुलेंस का इस्तेमाल पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया जाता है । कोविड महामारी के चलते पुलिस भी अधिक ध्यान नहीं देती थी। यह लोग आसानी से एम्बुलेंस को तस्करी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।

पुलिस ने मद्रासी कालोनी से और अधिक जानकारी इकठ्ठी कर दक्षिण भारत के तीन और दिल्ली से एक ड्रग्स माफियाओं को गिरफ्तार कर लिया । इस गिरफ्तारी में मुख्य ड्रग्स माफिया शोले राज को गिरफ्तार करने में पुलिस कामयाब हो गई । ये लोग तस्करी के लिए सारा गांजा चैन्नई से विशाखापट्टम भेजते थे, विशाखापट्टम के किसी गांव में सारा गांजा इकठ्ठा किया जाता था फिर उसकी पैकिंग कर दी जाती थी। इस गैंग के दो ख़ास आदमी बाबू राव और नागेश्वर राव विशाखापट्टम से एम्बुलेंस में सारा गांजा लादकर उत्तरी दिल्ली के मोरी गेट के मद्रासी कॉलोनी पर लाते थे। मद्रासी कॉलोनी में रमेश को सौंपकर यह फ्लाइट पकडकर विशाखापट्टम चलते जाते थे। 17 अक्टूबर को बाबू राव और नागेश्वर राव को स्पेशल स्टाफ की टीम ने पहले ही दिल्ली में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जब दिल्ली माल पहुँचने के बाद दूसरे ड्रग्स माफिया माल के पैसे की वसूली के लिए विशाखापट्टम से दिल्ली आते थे। इसके लिए वह लोग ट्रैन, कार, बस का इस्तेमाल नही करते थे । यह विमान द्वारा दिल्ली आते थे और गांजे का पैसा इकट्ठा करने विमान द्वारा विशाखापट्टम चलते जाते थे । इनका कहना है की दिल्ली में यह गांजा दुगनी कीमत पर बिकता है । पुलिस ने इनके पास 180 किलो गांजा बरामद किया है, जिसकी कीमत 1 करोड़ 80 लाख आंकी गई है ।
जिले की पुलिस ने अपनी जांच को जारी रखा हुआ है। दिल्ली में अभी कई ड्रग्स माफियाओं को पुलिस तलाश रही है जिनका इस माफियाओं से सीधा लिंक है



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