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साहसी पुलिस अधिकारी की सभी ने देखी बहादुरी

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16 तारीख की दोपहर नार्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के मुखर्जी नगर इलाके में एक दिल्ली पुलिस अधिकारी ने  हिम्मत और बहादुरी की मिसाल पेश की है। मुखर्जी नगर थाने के पास ग्रामीण सेवा चालक और पुलिस में किसी बात को लेकर टकराव शुरू हो गया। तभी अचानक ग्रामीण सेवा चालक सरबजीत सिंह ने सरेआम सड़क पर कानून व्यवस्था को ताक पर रखते हुए हुए नंगी तलवार से पुलिस दल पर हमला बोल दिया। सरबजीत के हाँथ में नंगी तलवार देख कई पुलिस भय के कारण उससे दूर हो गए किसी में साहस नहीं हो रहा था उस हमलावर के करीब जाने का किन्तु इनमे एक दिलेर पुलिस अधिकारी  वाला भी था जो इस मंज़र से बिलकुल डरा नहीं। सादी वर्दी पहने इस पुलिस अधिकारी ने अकेले बिना किसी खौफ के खतरनाक रूप से तलवार चला रहे हमलावर सरबजीत सिंह को पीछे से जकड़ कर पकड़ लिया।
इस जाबांज का नाम है योगराज शर्मा जो मुखर्जी नगर थाने में एएसआई के पद पर तैनात  है।
योगराज शर्मा ने पीछे ने जाकर हमलावर को पीछे से जकड़ लिया मगर हमलावर योगराज शर्मा की बाँहों की गिरफ्त छुड़ा कर अपनी धारदार तलवार से योगराज शर्मा पर टूट पड़ा और ताबड़तोड़ कई वार कर डाले।  इस अधिकारी ने भी मौत से लड़ने की ठान ली थी, योगराज शर्मा ने जान की परवाह किये बिना सरबजीत की तलवार के हमले को झेलते हुए दोबारा पकड़ लिया। इस बार योगराज शर्मा ने उसे दुगनी ताकत के साथ जकड़ लिया। सरबजीत ने भी गिरफ्त से छूटने की काफी मशक्क्त की मगर योगराज शर्मा की पकड़ इतनी मजबूत थी की अपने आपको छुड़ा नहीं पाया।
इस हमले के दौरान एएसआई के सिर पर तलवार लग चुकी थी और सिर से खून बह रहा था मगर इस अधिकारी ने हिम्मत नहीं हारी और हमलावर को जब तक पकड़े रखा जब तक अतिरिक्त पुलिस दल ने आकर उस हमलावर को पकड़ नहीं लिया।
घायल एएसआई योगराज शर्मा को अस्पताल ले जाया गया और वहां उसके सिर पर तलवार लगने से गहरा घाव हो गया था।  योगराज शर्मा के सिर पर टाँगे लगा दिए गए हैं और अभी उनको डाक्टरों की देखरेख में रखा गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
पुलिस विभाग द्वारा जांच से पता चला है की हमलावर सरबजीत सिंह जो ग्रामीण सेवा वाहन चालक है उसके ऊपर पहले भी पुलिस में मुक़दमे दर्ज हैं :
पहला मामला साल 2006 मे तिमार पुर थाने का है।
#DD No 33 PP Jhadoda 107/151 CrPC 20.09.2006
जबकि दूसरा मामला साल 2011 का बुराड़ी थाने का है।
#DDNo.16 PP Jhadoda 107/151 CrPC 25.07.2011
तीसरा मामला साल 2013 का तिमार पुर थाने का है
#DD No. 102 B 107/151 CrPC 27.07.2013
दिल्ली पुलिस में ऐसे सहासी जुर्म से टक्कर लेने वाले अधिकारी की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।  योगराज शर्मा की बहादुरी देखते हुए को यकीनन पदोन्नति से नवाजा जाना चाहिए।
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