
नई दिल्ली : पुलिस और पुलिसिया डंडा इस परिभाषा से सभी वाकिफ है । जो लोग इसका अनुभव कर चुके हैं अच्छा या बुरा उनकी राय यकीनन जुदा जुदा हो सकती है मगर पुलिस महकमें में काम करने वाले किसी दूसरे ग्रह से आये मानव नही हैं । यह सभी इसी देश और समाज के बीच के लोग हैं जिनके दिल का कोई कोना इन्सानियत से वाकिफ है ।
सेन्ट्रल डिस्ट्रिक्ट की कमला मार्किट पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर और सिपाही ने ऐसा काम किया है जो इंसानियत के लिए एक मिसाल बन गया है। लोग कहते है पुलिस के दिल में किसी के लिए दर्द का अहसास नहीं होता मगर इन दोनों ने इस मिथक को झुठला दिया है।

बिहार के रहने वाले शिव नाथ यादव के 12 वर्ष के बेटे के दिल में छेद था और उसका पिछले चार साल से इलाज करवा रहा था। बिहार में जब इलाज संभव नहीं हुआ तो अपने बेटे गुड्डू को शिव नाथ दिल्ली ले आये। गुड्डू को दिल्ली के एम्स अस्पताल में लाया गया वहाँ गुड्डू के ऑपरेशन के लिए 21 नवम्बर की तारीख दे दी गई। इसी बीच गुड्डू की तबियत अचानक ज्यादा खराब हो गई। शिव नाथ अपने बेटे को लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल ले आये। वहाँ उसका इलाज़ शुरू हुआ मगर गुड्डू को डाक्टर बचा नहीं पाए और उसका निधन हो गया।
अपने बेटे के निधन के दुःख के साथ शिवकुमार के सामने एक समस्या उसको बिहार ले जाने की आई। शिव कुमार बिहार में मजदूरी का काम करता है, शिव कुमार की जेब में एक पैसा नहीं था। बेटे के शव को अपने घर बिहार भी ले जाना था, ऐसे में दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर महेश कुमार और सिपाही ललित गुड्डू की मौत की कॉल पर पहुँचे। दरअसल शिव कुमार अपने बेटे के शव को अस्पताल के बाहर सड़क पर लेकर बैठा रो रहा था उसी दौरान किसी ने 100 नंबर पर कॉल कर दी थी।

पुलिस कॉल पर कमला मार्किट थाने से सब इंस्पेक्टर महेश और सिपाही ललित मौके पर पहुँचे। सारे हालात देख कर इन दोनों का दिल पसीज गया। इसके बाद इन दोनों ने मानवता का परिचय देते हुए शिव कुमार को बिहार भेजने की कवायद शरू कर दी। इन दोनों ने अपने कुछ पुलिस साथियों से रकम इकठ्ठी की बाकी अपनी जेब से मिलाकर तकरीबन 13000 रूपये जोड़ लिए। इसके पश्चात सारी रकम शिवकुमार को देकर गुड्डू के शव को एम्बुलेंस में सम्मान के साथ रखवाकर बिहार के लिए रवाना कर दिया। इस प्रकार इन दोनों ने दिल्ली पुलिस में रहकर कानून व्यवस्था को सँभालते हुए अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाह करते हुए प्रशंसनीय कार्य किया है।

