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27 APRIL: दिल्ली पुलिस की नई PCR एक्शन में, ढाई घंटे में ढूंढ निकाली सिक्किम की महिला की रकम

कंझावला अंजली कांड के बाद बदनाम हुई पीसीआर के पुनर्गठित होने के बाद इसका अंदाज कुछ बदला बदला सा दिखाई दे रहा है,

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दिल्ली पुलिस की पीसीआर को जब से नई पारी का प्रभार मिला है, उसके बाद से  पीसीआर स्टाफ लोगों की सहायता करने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं लिहाजा अब लगातार जनता में पीसीआर के प्रति विश्वास पनप रहा है

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की पीसीआर को जब से स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है उसके बाद से लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है । साउथ वेस्ट जोन की पीसीआर में तैनात पुलिस कर्मियों ने एक महिला की जिस पुलिस कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए मदद की उसकी प्रशंसा होना लाजमी है.

बुधवार दोपहर सिक्किम की रहने वाली महिला इंद्रा (31) अपनी बहन के पास हरिद्वार जा रही थी. और अपना पैसों से भरा बैग ऑटो में भूल गई. जब उसको एहसास हुआ उसका बैग ऑटो में ही छूट गया. यह महिला घबराई हुई PCR जेबरा 28 अल्फा जो किशनगढ़ गऊशाला, गेट नंबर 2 के पास पहुंची. उस वक्त ड्यूटी पर तैनात हवलदार मनोज कुमार यादव और सिपाही अमित को रोते हुए बताया कि वह सिक्किम की रहने वाली है और दिल्ली में घरों में आया का काम करती है. इसकी बहन बीमार है जिसको इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी. उसे पैसा देने हरिद्वार उत्तराखंड जा रही थी. किसी जरूरी काम से रास्ते में उतर गई थी. ऑटो चले जाने के बाद उसे ध्यान आया उसके बैग में तीन महीने की तनख्वाह तकरीबन 39 हजार रुपए थी जो ऑटो में बैग के साथ चली गई.

पीसीआर में ड्यूटी दे रहे हवलदार मनोज कुमार यादव और सिपाही अमित ने इंसानियत की खातिर अपने तौर पर महिला की मदद के लिए 2:30 बजे दोपहर से आस पास के सीसीटीवी देखने शुरू किए. काफी मशक्कत के बाद दोनों पीसीआर कर्मियों को एक दुकान के सीसीटीवी में ऑटो की फुटेज मिल गई जिसमें महिला ने बीच रास्ते में ऑटो रुकवाकर कुछ सामान खरीदा था. उसी रोड पर कुछ और सीसीटीवी कैमरे देखें जिनमे ऑटो का नंबर साफ दिखाई दिया. ऑटो के नंबर से ऑटो चालक का नाम मोबाइल नंबर ढूंढा गया. फिर
ऑटो चालक को कॉल करके पीसीआर जेबरा 28 के प्वाइंट पर किशनगढ़ बुलाया गया. 5 बजे तक ऑटो चालक ने महिला का बैग और उसमें रखी 39 हजार की रकम सौंप दी. ड्राइवर ने बताया यह बैग पीछे की सीट पर रखा था जिसका उसको बाद में पता चला जब कोई नई सवारी बैठने लगी. बैग के मालिक का पता और मोबाइल नंबर भी नही था. पीसीआर कर्मियों का फोन आते ही तुरंत महिला की अमानत सौंपने आ गया.

पीसीआर ने इस मेहनतकश गरीब महिला की मदद करके दिल्ली पुलिस के ‘सिटीजन फर्स्ट’ सेवा को सही मायने में सार्थक किया है

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