
दिल्ली पुलिस को धन्यवाद के रूप में दिल से`सेल्यूट’ करती श्रद्धा सोमानीशांति, सेवा, न्याय यह तीन प्रतिज्ञाएं दिल्ली पुलिस के आदर्श को प्रतिष्ठित करती हैं. इस कोरोना महामारी काल में प्रतिकूल परिस्तिथियों में दिल्ली पुलिस ने कई आदर्श कार्य कर जनता में अपना विश्वास कायम किया है. सेंट्रल दिल्ली के कमला मार्किट थाने की पुलिस अपने नए आदर्श वाक्य `दिल्ली पुलिस दिल की पुलिस को’ बखूबी सार्थक कर रही है. कल रात कमला मार्किट थाने के एक सिपाही ने ऐसे काबिले तारीफ काम किया है जिसने पुलिस की छवि को गौरान्वित किया है.
वाकया कुछ यूं है !.हमेशा की शाम 5 बजे से मार्किट, बाजार बन्द होने के बाद जब सारा इलाका वीराने में तब्दील हो जाता है ऐसे में थाना SHO की हिदायत के अनुसार थाने का हर मुलाजिम सुनसान पड़े इलाके में पेट्रोलिंग पर होता है. कल रात तकरीबन 9 बजे सिपाही महेश रामलीला मैदान के जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर गश्त कर रहा था. सिपाही महेश को रामलीला मैदान के पास गेट नम्बर 5 पर एक महिला घबराई हुई परेशान सी दिखाई दी. सिपाही ने जब उसके पास जाकर पूछा तो महिला ने बताया की उसका नाम श्रद्धा सोमानी है और वह मल्टी नेशनल कंपनी में काम करती है. वह गुरुग्राम हरियाणा रहती है, दिल्ली किसी से मिलने आई थी अब उसे वापिस हरियाणा जाना है. उसकी कार खराब हो गई है, बहुत देर से सहायता के लिए खड़ी है मगर सब अनदेखा करके निकल गए.

सिपाही महेश ने लड़की को दिलासा दिया ओर उसकी कार को खुद चैक किया तो बैटरी खराब पाई. महेश ने कार से बैटरी को निकाला ओर अपनी बाइक पर बांध कर दरियागंज ले गया, वहां सारी दुकाने बन्द मिली, इसके बाद जामा मस्जिद मोटर मार्किट पहुंचा वहां भी सभी दुकानों के शटर गिर चुके थे. इसके बाद उसने इलाके के कार मकैनिक को फोन किया, पता चला कार मकैनिक अलीगढ़ गया हुआ है. इसके बाद उसने उससे नम्बर लेकर दूसरे मकैनिक से सम्पर्क किया वह दूर रहता था उसने आने के लिए मना कर दिया. मगर महेश ने हिम्मत नही हारी वह उस बैटरी लेकर उस मकैनिक के घर पहुंच गया ओर वहां से मकैनिक को साथ बैठाया औऱ दूसरी बैटरी लेकर रामलीला मैदान आ गया. दूसरी बैटरी कार में लगाई तो कार स्टार्ट हो गई. तकरीबन चार घण्टे तक यह सिपाही इस महिला की मदद की खातिर भाग दौड़ करता रहा.

अब आप सोचिए रात को एक अकेली महिला जिसकी गाड़ी बीच सड़क ख़राब हो जाए! रात में आसपास कोई गाड़ी ठीक करने वाला मकैनिक नहीं, समझ नहीं आए की अब क्या किया जाए! असहाय, हताश और सुनसान सड़क पर ख़ुद अकेली महिला होने का डर। दिल्ली जैसे शहर में अनुमान लगाना आसान है की उस अकेली महिला के साथ क्या अनहोनी हो सकती थी। लोगों में विश्वास लाने के लिए पुलिस को दिए गए आदर्श वाक्यों को सार्थक करने के लिए ऐसे काम भी करने पड़ते हैं. और यही काम दिल्ली पुलिस के एक जवान महेश ने किया।
श्रद्धा सोमानी दिल्ली पुलिस के इस सिपाही की मदद से प्रभावित होकर कहा ` मैंने पहली बार दिल्ली पुलिस के इस मददगार रूप को देखा है. दिल्ली पुलिस ने इस मुश्किल वक्त में मेरी मदद की में उसको दिल से सेल्यूट करती हूँ, . सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी संजय भाटिया ने इस सिपाही के प्रयास की सरहाना करते हुए कहा ‘सेवा’ का भाव दिल्ली पुलिस के दिल में है इसलिए हमे दिल की पुलिस कहा जाता है, इस सिपाही को उसके कार्य के लिए सम्मानित भी किया जाएगा.

सेन्ट्रल दिल्ली में लगातार चौथी दिन भी बदमाशों की गिरफ्तारी

