
नई दिल्ली : इसी वर्ष फरवरी के माह में दिल्ली के एक नामचीन अस्पताल में डॉ. शिवानी (बदला हुआ नाम) को वैवाहिक वेब साइट माध्यम से ठग लिया गया। डाक्टर शिवानी का मेट्रीमोनियल वेब साईट पर विवाह के लिए अंकुश नाम के व्यक्ति के संपर्क हुआ। इस डॉक्टर अंकुश नाम के व्यक्ति ने बताया वह यूके में रह रहे हैं। इस डाक्टर ने शिवानी से विवाह करने के लिए अपनी अच्छा जाहिर की और कुछ दिनों के बाद, उसने उसे व्हाट्सएप पर फोन किया और कहा कि वह 22.02.2022 को भारत आ रहा है और उसने मुंबई हवाई अड्डे के लिए उड़ान का टिकट बुक किया था, क्योंकि दिल्ली के लिए सीधी उड़ान का टिकट उपलब्ध नहीं था।
23.02.2022 को, डॉक्टर शिवानी के पास मीनाक्षी नाम की महिला का टेलीफोन पर कॉल आया। इस महिला ने कस्टम विभाग मुंबई एयरपोर्ट के एक कर्मचारी के रूप में अपना परिचय दिया। उसने कहा कि उन्होंने डॉ. अंकुश को 15000 पाउंड की अवैध धनराशि के साथ पकड़ा है। उसने आगे उस व्यक्ति को रिहा करने के लिए 1,76,500/- रुपये और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप मांग की। डॉ. अंकुश ने पुष्टि के बारे में उसे व्हाट्सएप संदेश भी भेजा। डाक्टर शिवानी ने रुपये की राशि स्थानांतरित कर दी। उस महिला द्वारा दिए गए खाते में 1,76,500/- रूपये भेज दिए गए इसके बाद महिला ने शिकायतकर्ता से जीएसटी और कमीशन आदि के बहाने और पैसे की मांग की।
शिकायतकर्ता ने कुछ शक हुआ और उसने अपने दोस्तों के साथ इस मामले पर चर्चा की। इसके बाद, एफआईआर संख्या 05/2022, 03.03.2022, यू/एस- 419/170/34 आईपीसी, साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल, दिल्ली के तहत एक मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
टीम :
इस ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज होने के बाद एसीपी राजबीर मलिक, साइबर पुलिस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर खेमेंद्र पाल सिंह,ने एक जांच टीम।बनाई जिसमें एसआई कमलेश कुमार, एसआई पवन यादव, एसआई अली अकरम, एएसआई सिरमोर, हवलदार सागर, हवलदार ओमबीर, सिपाही रूबी शामिल किये गए


पुलिस की जाँच पड़ताल :
जांच के दौरान, जिस खाते में डॉक्टर शिवानी से रकम मंगाई गई थी उस खाते का बैंक विवरण प्राप्त किया गया । इसमें खुलासा हुआ कि बैंक खातों में बड़ी संख्या में लेन-देन किया जा रहा था। इसके अलावा, इन खातों में जमा किए गए धन को अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था और तुरंत ATM के माध्यम से निकाला जा रहा था। पैसे को घुमाने के लिए एक व्यक्ति के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे। विभिन्न बैंकों से बैंक खातों का विवरण इकट्ठा किया गया। टीम ने आगे उन एटीएम का विवरण एकत्र किया जहां से पैसे निकाले गए थे। अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के सीडीआर का डिटेल निकाला गया। जिस बैंक खाते में शिकायतकर्ता ने पैसा ट्रांसफर किया था, वह आरोपी बबलू कुमार यादव के नाम से मिला । 05.मार्च 2022 को उसे पकड़ लिया गया और पूछताछ की गई। पूछताछ करने पर आरोपी बबलू सिंह यादव ने अपना जुर्म कबूल किया और खुलासा किया कि उसने कासिम के निर्देश पर बैंक खाते खुलवाए थे और एटीएम कार्ड, पासबुक आदि सहित सभी बैंक डिटेल उसे सौंप दी थी । आगे खुलासा किया कि उन्हें सिंगल बैंक अकाउंट खोलने के लिए 20,000/- रुपये मिलते थे। इसके अलावा कुल जमा राशि पर 5% कमीशन का भुगतान भी किया गया था। उसके कहने पर आरोपी कासिम को भी उसके पैतृक गांव से गिरफ्तार किया गया था।लगातार पूछताछ के दौरान आरोपी कासिम ने खुलासा किया कि वह अलग-अलग लोगों से अलग-अलग बैंक खाते खुलवाता था ताकि ठगे गए पैसे को उचित कमीशन देकर क्रेडिट किया जा सके। वह आगे एक अफजल खान को बैंक खातों का विवरण और डेबिट कार्ड आदि सौंपता था।

जांच के दौरान आरोपी कासिम के कहने पर आरोपी अफजल खान को भी गिरफ्तार कर लिया गया। लगातार पूछताछ के दौरान आरोपी अफजल खान ने खुलासा किया कि वह कई अफ्रीकी नागरिकों के संपर्क में था, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल हैं। वह उन्हें कमीशन के आधार पर बैंक विवरण देता था, जो क्रेडिट राशि का 10 से 15 फीसदी होता था। इसके अलावा, आरोपी अफजल के कहने पर आरोपी मूसा (नाइजीरियाई नागरिक) को 11.मार्च.2022 को निहाल विहार, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। आरोपी की मोबाइल फोन की डिटेल से पता चला है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कई निर्दोष लोगों को ठगा है।

इस तरह आरोपी मूसा ने आगे खुलासा किया कि वह 25.03.2019 को छह महीने के लिए मेडिकल वीजा पर भारत आया था जिसके बाद वह अपने देश नहीं लौटा। उसके पासपोर्ट से पता चला कि उसने अपने सूत्रों से फर्जी बिजनेस वीजा की व्यवस्था भी की थी। बैंक खातों के लेन-देन से पता चला कि इन खातों में बड़ी राशि जमा की गई थी, जो विभिन्न व्यक्तियों द्वारा जमा की गई थी। आरोपी विकास बंसल अन्य आरोपी व्यक्तियों को बैंक खाते भी उपलब्ध कराता था। उसके कहने पर आरोपी इफेनी को भी गिरफ्तार किया गया जिसने खुलासा किया कि वह वर्ष 2014 में भारत आया था। वह भारत में रहने वाले अपने देश के विभिन्न लोगों के संपर्क में आया और उपहार भेजने और लॉटरी जीतने आदि के बहाने लोगों को ऑनलाइन ठगना शुरू कर दिया। वह फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाता था और फेसबुक पर लोगों से संपर्क करता था। बाद में, वे उनका व्हाट्सएप नंबर मांगते थे और पीड़ितों को यह कहते हुए लुभाते थे कि वे उन्हें उपहार भेज देंगे। 3-4 दिनों के बाद, कोई व्यक्ति ज्यादातर महिलाएं फोन करती थीं कि पार्सल एयरपोर्ट पहुंच गया है और उन्हें कस्टम ड्यूटी देनी है।
इस गैंग ने नए तरीके से पैसा ठगने का धंधा शुरू किया हुआ था । इन लोगों ने एक विवाह शादी के लिए एक वैवाहिक वेब साइट बनाई हुई थी । उस साइट पर विदेश में रह रहे स्मार्ट और आकर्षक दिखने वाले युवक युवतियों की फ़ोटो और फर्जी प्रोफ़ाइल बनाई हुई थी । इस साइट पर जब भारत का कोई युवक युवती इस साइट पर फंस जाता तो उससे मिलने के लिए भारत आने की बात कहते । यदि इनका कोई शिकार दिल्ली में रहता तो मुंबई एयरपोर्ट से फर्जी फोन करवाते थे और यदि मुम्बई में रहता तो दिल्ली एयरपोर्ट से कस्टमर विभाग के अधिकारी बनकर फोन करवाते थे । लोग यकीन मान लेते थे जिस तरह डॉक्टर शिवानी को झांसा देकर रकम ट्रांसफर करवाई गई उसी ठगी के फार्मूले को कई लोगों पर इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये ठगे गए ।
आरोपियों की सूची
बबलू सिंह यादव (23), कासिम खान (23), अफजल खान (29), विकास बंसल (27), मूसा (37), इफेनी वेलेंटाइन (33) दोनों नाइजीरियाई नागरिक, 7 साल से पूरे भारत में सक्रिय थे और 500 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं ।
1. बबलू सिंह यादव (23 वर्ष) पुत्र रघुवीर सिंह यादव निवासी मंडी, दक्षिणी दिल्ली, हाउसकीपिंग का कार्य करता है। वह अविवाहित है और उसने ठगे गए पैसे को क्रेडिट करने के लिए अलग-अलग बैंकों में 5 खाते खोले थे।
2. कासिम खान (23), बरेली यूपी का रहने वाला है। यह ठगे गए पैसे को ट्रांसफर करने के लिए जानकर व्यक्तियों से बैंक खातों की व्यवस्था करता था। वह पहले 1 आपराधिक मामले में शामिल रहा है।
3. अफजल खान (29) पुत्र बरेली (यूपी)। वह मजदूरी का काम करता है। वह अपने गांव के रहने वाले सद्दाम के जरिए नाइजीरियाई धोखेबाजों के संपर्क में आया था। ठगी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए वह कई जाने-माने लोगों के खातों की व्यवस्था करता था। वह पहले 1 आपराधिक मामले में शामिल रहा है।
4. विकास बंसल (27) संगम विहार दिल्ली का रहने वाला । यह प्रॉपर्टी सेल में ब्रोकर का काम करता था। वह नाइजीरियाई नागरिक के संपर्क में आया जो ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल थे और उन्हें बैंक खातों का विवरण प्रदान करते थे।
5. मूसा (37) नाइजीरिया का रहने वाला। वह मार्च 2019 में मेडिकल वीजा पर भारत आया और वापस नहीं लौटा। तभी से वह ऑनलाइन ठगी में लिप्त था।
6. इफेनी (33) नाइजीरिया का रहने वाला है। वह अप्रैल 2014 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था और वापस नहीं लौटा। तभी से वह ऑनलाइन ठगी में लिप्त था।
इस केस में एक खास बात जो सामने आई है वह यह कि गिरफ्तार नाइजीरिया के दोनों आरोपी भारत में अवैध तरीके से वर्षों से भारत रहकर अपराधों को अंजाम से रहे हैं । अभी तक FRRO के वीजा पंजीकरण विभाग की आंख से कैसे बचे हुए है यह एक सवाल है जिसका जवाब भारत के विदेश मंत्रालय को भी देना होगा ।


