
अपहरण के नौ महीने बाद अपनी माँ छोटी की गोद में तीन साल की यास्मीन
नई दिल्ली : अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, पर यदि आप लोग जाते अपने बच्चों के साथ जाते हैं तो उनका ख़ास ख्याल रखिये क्योंकि कहीं ऐसा न हो की बच्चे चुराने वाला गैंग आपके बच्चे पर नजरें गड़ाए बैठा हो। आपकी जरा सी लापरवाही आपके जिगर के टुकड़े को आपसे दूर कर सकती है।
सेन्ट्रल दिल्ली के दरियागंज थाना पुलिस नौ महीने पहले अगवा हुई 3 साल की बच्ची को ढून्ढ कर उसके परिवार को सौंप दिया। पिछले साल यह तीन साल की बच्ची अपनी माँ के साथ दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल आई थी। बच्ची जब खेल रही थी तभी वहाँ से गायब हो गई, परिवार के लोगों ने बच्ची को सारे अस्पताल में ढूंढा मगर बच्ची कहीं नहीं नहीं मिली। पूछताछ के बाद लोगों ने बताया की इस हुलिए का बच्चा एक भिखारिन सी दिखने वाली महिला के साथ देखा गया है।
इस बाद बच्ची के परिवार ने गीता कालोनी थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस ने बच्ची की खोज के लिए सभी हथकंडे इस्तेमाल किये मगर बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया। नौ महीने तक बच्ची की तलाश करने के बाद बच्ची के माँ बाप और पुलिस थक हार कर बैठ गए।

7 जुलाई 2019 को एक महिला अचानक दरियागंज थाना इंचार्ज राकेश शर्मा से मिली और उसने बताया की उसकी 2 साल की बेटी 12 नवम्बर 2018 को पूर्वी दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल से अगवा कर ली गई थी और उसको किसी से पता चला है की उसकी बेटी की शक्ल की बच्ची एक महिला के साथ दरियागंज में घूमती दिखी है।

तीन साल की यास्मीन की अपहरणकर्ता महिला को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी
दरिया गंज थाना प्रभारी राकेश शर्माने तुरंत छोटी बच्ची के मामले पर गंभीरता बरतते हुए ASI सतीश शर्मा को इस केस का जिम्मा सौंप दिया। ASI सतीश शर्मा ने अगवा हुई बच्ची की माँ के साथ उसकी तलाश शुरू कर दी। बच्ची को दरिया गंज की गलियों से लेकर सड़कों पर ढूंढा गया मगर उस महिला और बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।
बच्ची को उस महिला के साथ जिस ठिकाने पर आखिरी बार देखा था वहां पर पुलिस द्वारा नज़र रखी जाने लगी । पुलिस की मेहनत रंग लाई, बताये गए हुलिए की महिला के साथ एक बच्ची को सड़क पर जाते हुए देखा गया। पुलिस ने उस महिला को रोक लिया उसके पास जो बच्ची थी उसको उसकी माँ ने पहचान लिया, मगर बच्ची एक साल अपनी माँ से दूर रहने के बाद उसकी शक्ल भुला चुकी थी। जिस महिला के साथ बच्ची थी उसने बच्ची को अपनी बेटी बताया। मगर उसकी असल माँ ने दावा किया की यह उसकी एक साल पहले अपहरण की गई बेटी यास्मीन है।
पुलिस द्वारा कई घंटे पूछताछ करने के बाद उस महिला ने बच्ची के अपहरण का जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया की 12 नवंबर 2018को चच्चा नेहरू हॉस्पिटल बच्ची को अगवा करके ले गई थी। उसका मकसद इसको बेचना नहीं था, उसकी अपनी कोई संतान नहीं थी इसलिए उसे अपहरण करके लाइ थी और उसे संतान के तौर पर पालना चाहती थी।
इस आरोपी महिला का नाम चंदा है और यह दिल्ली के आई पी एस्टेट इलाके की अन्ना नगर की झुगियों में रहती है। पुलिस ने आरोपी पर आगे की कार्यवाही के लिए गीता कालोनी थाना पुलिस को सूचित कर दिया। इस तरह पुलिस की ने एक साल से अपनी बेटी के तड़प रही माँ को उसकी बेटी से मिलवा दिया।


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