
नई दिल्ली : दिल्ली की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने अवैध रूप से रंगदारी करने वाले एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। मुख्य आरोपी तिहाड़ जेल से मोबाइल फ़ोन के ज़रिए पूरा रैकट चला रहा था। ये गैंग बिल्डर्स और व्यापारियों को अपना शिकार बनाते थे।
ग्रैजूएट होने के बावजूद महेश उर्फ़ मन्नू(39) ने आसानी से पैसा कमाने और ग़ैर क़ानूनी धंधो में अपना नाम बनाने के लिए शुरू किया अवैध वसूली का धंधा। इसके लिए उसने नए नए अपराधियों को अपने गैंग में शामिल किया। हत्या के एक मामले में पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। मगर जेल से भी वहाँ के एक साथी अतर रहमान उर्फ़ रतवा की मदद उसने फिर से वहाँ से भी अपना रंगदारी का धंधा शुरू कर दिया। जुगल किशोर( 62) बिल्डर को मन्नू ने कई बार विडीओ कॉल कर पैसों की माँग की और नही देने पर जान से मारने की धमकी दी। परेशान होकर जुगल किशोर ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। जिस नम्बर से कॉल आया था, कॉल डिटेल निकालने पर पता चला की वो मोबाइल और सिम नम्बर चोरी हो गए थे औरपुलिस में कोई कम्प्लेनंट नही दी गई थी। पुलिस को कुछ भी समझ नही आ रहा था की आख़िर आरोपी कौन है और कहाँ से फ़ोन कर है। मामले को गम्भीरता से लेते हुए ए॰सी॰पी॰ एच. एस. पी. सिंह के दिशानिर्देश और इन्स्पेक्टर मनिंदर सिंह की अगुवाई में एक टीम बनाई गई जिसमें सब इन्स्पेक्टर श्नारायण ओझा, प्रथापा चंद्रन, हेड कोन्स्टेबल रवि, कोन्स्टेबल नवीन और कृष्णा भुधरक को शामिल किया गया। सौ से भी ज़्यादा सी॰सी॰टी॰वी॰ और सिम कार्ड से सम्बंधित सभी नम्बरों को खँगालने के बाद भी कोई सुराग़ हाथ नही लग रहा था। इसके बाद पुलिस ने सूझबुझ से लोकल इंटेलिजेन्स का सहारा लिया और कड़ी मेहनत और लगन आख़िर रंग लाई और अशोक उर्फ़ अशोक कुमार उर्फ़ बिछुआ(40) तक पहुँची जो की इस मामले में शामिल भानु प्रताप(21) के साथ काम करता था। भानु प्रताप गोविंद उर्फ़ गोलू और राहुल और लड्डू के कांटैक्ट में थे। इस तरह पुलिस जानकारी जुटाते हुए तिहाड़ जेल में बंद मन्नू तक पहुँच गई। फ़िलहाल पुलिस ने भानु प्रताप(21), अशोक कुमार उर्फ़ बिछुआ(40) है और साथ ही साथ इनके मुख्य सरगना महेश उर्फ़ मन्नू(39) को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है और महेश उर्फ़ मन्नू(39) का नाम इस मामले में दर्ज कर लिया है। फ़िलहाल इस गैंग के 3 और सदस्य पुलिस की गिरफ़्त से बाहर है। पुलिस उनकी तलाश में हैं।



Comments