
नई दिल्ली : देश में टेलीकॉम कंपनियों की खामियों का फायदा ठगी करने वाले बेखौफ उठा रहे हैं । जिसके चलते लोगों के बैंक खातों से करोड़ों की राशि ट्रांसफर की जा रही है । खास कर जो NRI हैं और विदेशों में बैठे हैं ।

अब आप भी सावधान हो जाएं ! मोबाइल कम्पनियां आपके द्वारा इस्तेमाल न किये जाने वाले सिम नम्बर को 3 महीने में बन्द कर देती है । इसके बाद उस नम्बर को किसी दूसरे के नाम पर इश्यू कर देती है । खतरा जब पैदा होता है यदि उस नम्बर पर आप नेट बैंकिंग करते थे और आपके बैंक में वही नम्बर रजिस्टर्ड है । ऐसे में यदि आपके बैंक में मोटी रकम है तो बैंक के बेईमान कर्मचारी और साईबर ठगी करने वाले मिलकर आपकी बैंक में जमा मेहनत की कमाई आसानी से निकाल सकते हैं !
इसी तरह का एक मामला सेंट्रल दिल्ली के राजिंदर नगर थाने में पिछले वर्ष 13 नवम्बर 2020 को दर्ज किया गया था । जिसमें एक महिला जिनका नाम कनिका गिरधर है । कनिका गिरधर, जर्मनी में रहती हैं एक NRI हैं । भारत में कुछ माह के लिए आती हैं । इस बार कोविड के कारण भारत नही आ पाई ।
कनिका ने अपनी शिकायत में कहा कि कि ” नवंबर में उसने अपना बैंक खाता लॉगिन करने का प्रयास किया मगर वह लॉगिन नही हुआ । बाद में पता चला ICICI बैंक में जमा 1 करोड़ 35 लाख की FD की रकम निकाल ली गई । बैंक ने जानकारी दी उनके नाम से नई चैक बुक, ATM कार्ड जारी किया गया है । कनिका ने इनकार करते हुए बैंक को बताया कि “उन्होंने कोई भी चैक बुक या ATM कार्ड जारी नही करवाया है । और न ही इसके लिए कोई बैंक को अनुरोध किया है ।”
अजीबोगरीब उलझे हुए इस मामले में तकनीकी जांच की आवश्यकता को देखते हुए, डीसीपी सेंट्रल ने मामले की जांच जिला साइबर सेल को 22 दिसम्बर 2020 को ट्रांसफर कर दी ।
साइबर सेल के अधिकारियों की एक टीम जिसमें एसीपी योगेश मल्होत्रा, इंस्पेक्टर जगदीश कुमार एसआई कमलेश कुमार, एसआई अली अकरम, एएसआई एसपी कौशिक, एएसआई सिरमोहर, एचसी तेजवीर सिंह, हवलदार सुरेश, सिपाही ओमवीर सिंह, कुलदीप, चौ. अरुण, अश्विनी मुकेशंद, शामिल थे ।
जिला साईबर सेल की टीम ने ग्यारह माह बाद एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है जिसने ऑनलाइन ठगी से धन की हेराफेरी करके बैंक खाते से 1.35 करोड़ की धन राशि ट्रांसफर कर ली थी ।

सेंट्रल डिस्ट्रक्ट डीसीपी श्वेता चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि “टेक्नीकल जांच में अपराधी की पहचान सुमित पांडे के रूप में हुई जो ICICI बैंक का कर्मचारी था । पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान साइबर ठगी का राज खुला । ICICI बैंक में सुमित पांडे को कनिका के बैंक खाते में जमा 1.35 करोड़ राशि का पता चला तो लालच आ गया । इसने शैलेंद्र प्रताप सिंह के साथ मिलकर कनिका गिरधर के बैंक खाते से राशि निकालने की साजिश रची ।”
कनिका गिरधर के बंद किये जा चुके मोबाइल नम्बर को इश्यू करवा लिया । इसके लिए नीलम नाम की महिला को इस अपराध में शामिल किया गया । नीलम को कनिका गिरधर के प्रतिरूप में रखा गया था । मोबाइल कम्पनी ने सिम नम्बर शुरू कर दिया जिसपर नेटबैंकिंग दोबारा शुरू हो गई ।
शैलेंद्र प्रताप सिंह ने फरीदाबाद में WORK FORCE PVT. LTD. नाम की फर्जी कंपनी बना ली । इस कम्पनी के दफ्तर में जगदम्बा प्रसाद पांडेय और आदर्श जयसवाल उर्फ राहुल वहाँ प्रबंधकों के रूप में नियुक्त किया । शुरुआत में लगभग 10 मजदूरों को काम पर रखा गया । उन्हें एक्यूटॉस स्मॉल फाइनेंस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक में मजदूरों को खाते खोलने के लिए कहा गया । इन खातों को खुलवाकर नेटबैंकिंग से ऑनलाइन कनिका गिरधर की 1.35 करोड़ की राशि इन मजदूरों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई । बाद में मजदूरों के ATM कार्ड अपने कब्जे में लेकर पूरी राशि निकाल ली गई । बाद में किराए के कार्यालय में ताला लगा कर गायब हो गए ।
इस साईबर ठगी का मास्टर माइंड सुमित पांडे (24) जो गाजियाबाद का रहने वाला इससे पहले यह आईसीआईसीआई बैंक के साथ काम कर रहा था इसने कनिका गिरधर के खाते और मोबाइल नम्बर की सारी जानकारी निकाल ली थी । इसने ओल्ड रजिंदर नगर की ICICI बैंक शाखा में पब्लिक रिलेशन ऑफीसर के पद पर रहकर यह सारी साजिश रची । इसने शैलेंद्र (43) को साथ मिलाकर पैसे निकालने की साजिश रची । इसने सहयोगियों के तौर पर जगदम्बा पांडेय और आदर्श जयसवाल उर्फ राहुल को अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए शामिल किया और पैसा निकालने के लिए फर्जीवाड़ा करते हुए कनिका गिरधर की चेक बुक पर हस्ताक्षर किये । इस अपराध में शामिल नीलम (32) ने कनिका बनकर बैंक कस्टमर केयर से नई पासबुक और नया ATM कार्ड के लिए बात की । जगदंबा प्रसाद पांडे (22) ने मजदूरों को काम पर रखा । नौकरी दिलाने के नाम पर मजदूरों के खाते अलग-अलग बैंक में खुलवाए जिसमें राशि ट्रांसफर कर दी गई । आदर्श जयसवाल उर्फ राहुल भी इस अपराध में बराबर का हिस्से दार रहा ।

पुलिस ने 1.35 करोड़ की रकम में से 27 लाख की रकम बरामद कर ली है । 2 iphone जिनकी कीमत 2.50 लाख है इसी रकम से लिये गए थे । इसके अलावा शैलेन्द्र ने 41 लाख की प्रॉपर्टी खरीद ली थी । एक कार, एक बुलेट भी ठगी की गई रकम से खरीदी गई थी ।


