
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने एक दो साल से गुमशुदा हुई जर्निलज्म की छात्रा को दिल्ली के पहाड़ गंज से ढूंढ निकाला। इस जर्निलज्म की छात्रा का नामचेष्ठा दास (बदला हुआ नाम) है।
चेष्ठा दास (बदला हुआ नाम) की कहानी पश्चिम बंगाल के 24 परगना, जसोर रोड (कलकत्ता ) से शुरू होती है। श्रेष्ठा 2017 से पश्चिम बंगाल के 24 परगना, जसोर रोड कलकत्ता अपने घर से अचानक गायब हो गई थी, परिवार के लोगों ने बहुत खोजा मगर कोई सुराग नहीं मिला।

23 जून शाम को तक़रीबन 6 बजे सेंट्रल डिल्ली थाना पहाड़ के थाना इंचार्ज के पास एक फोन आता की उसकी बेटी शायद दिल्ली के पहाड़ इलाके में है जो पीछे 2 साल से बंगाल से गुमशुदा है। थाना इंचार्ज सुनील चौहान ने जब इस फोन कॉलर से सारी बात सुनी तो मालूम हुआ की फोन करने वाला शख्स श्रेठा का पिता है, जिसके पास पहाड़गंज से किसी अज्ञात फोन पर बताया गया की एक लड़की भूखी प्यासी सड़क घूम रही है, इसके बाद कॉलर ने फोन कट दिया। लड़की के पिता ने कॉलर को बार बार फोन करने की कोशिश की मगर कॉलर ने फ़ोन नहीं उठाया। पिता ने बाद गूगल से पहाड़ गंज थाना इंचार्ज का ऑनलाइन नंबर ढूंढा। नंबर मिल जाने के बाद फोन पर सारे हालात बताये मगर उसको यह नहीं पता था की लड़की पहाड़ गंज के किस अज्ञात कोने में है।
थाना इंचार्ज सुनील चौहान ने के फोन के सारे हालत एसीपी संजीव गुप्ता को बताये एसीपी संजीव गुप्ता ने निर्देश के बाद थाना इंचार्ज सुनील चौहान और चौकी इंचार्ज दीपक कुमार ने की तलाश के लिए संगतराशन चौकी का स्टाफ को तत्काल कार्यवाही के लिए तैयार कर दिया ।


दो वर्षों से लापता छात्रा को ढूंढ निकालने वाली पुलिस टीम
दीपक कुमार ने अपने साथ ASI सैन सिंह, हवलदार मनोज, हवलदार योगेन्द्र कुमार, कांस्टेबल राम सिंह तथा महिला कांस्टेबल कोमल को साथ लेकर लड़की की तालाश शुरू कर दी। सभी अलग अलग दिशाओं में लड़की को ढूंढ रहे थे। इसी बीच चौकी इंचार्ज दीपक ने उस मोबाइल नंबर को ट्रैक किया जिस नंबर से लड़की के पिता को बंगाल कॉल आई थी। कॉल ट्रेक करते करते काफी मशक्क्त के बाद लड़की को पहाड़ गंज के मैंन बाजार अनुप होटल के पास बदहवास हालत में मिली।

दिल्ली पुलिस की टीम के साथ छात्रा और उसके पिता
लड़की पुलिस के साथ चलने से मना करने लगी। लड़की के मिलने के बाद पुलिस ने उसके पिता से समर्पक साधा और उन्हें दिल्ली बुलाया। पुलिस ने लड़की के पिता से फ़ोन पर बात करवाई तब जाकर लड़की को विश्वास हुआ। लड़की नशे में धुत थी पुलिस ने उसके पिता को इसकी जानकारी दी इसके बावजूद भी लड़की के पिता ने पुलिस से कहा लड़की को टिकट ख़रीदवाकर ट्रैन में बैठा दो। पुलिस ने लड़की के हालात को देखते हुए और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए, ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया और लकड़ी के पिता को दिल्ली आने के लिए कहा।
अगले दिन लड़की के पिता शाम को दिल्ली के पहाड़ गंज थाने पहुँच गए। दो साल बाद अपनी बेटी श्रेठा को पाकर पिता भावुक हो गए, उनको यकीन नहीं आ रहा था की उसकी बेटी उनके सामने है जिसकी दो साल से कोई खैर खबर नहीं थी। चेष्ठा दास (बदला हुआ नाम) के पिता ने अपनी बेटी के मिलने का सारा श्रेय पहाड़ गंज पुलिस को दिया और और कहा की पहाड़ गंज पुलिस ने मेरी बेटी की देखभाल एक माँ की तरह की है में दिल्ली पुलिस का अहसानमंद हूँ, दिल्ली पुलिस के व्यवाहर और तुरंत कार्यवाही पर संतोष जाहिर किया।



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